लाख छुपाती हु गमों को हसीं के पिछे,पर दोस्त पुछ ही लेते बताआे क्या बात है..
जब मिलती हु दोस्तो से,तो एक मुस्कुराहट का तोफा हर बार मिलता है.
दोस्ते के साथ बैठकर गम भुलाने की आदत हो गई है.
कभी कभी डर लगता है गलती होने पर दोस्त खफा न हो जाए,पर दोस्त भी कमाल के है एक उठक-बैठक पर मान जाते है.
कभी कभी भुल जाती हु,की मै इस दुनिया मै रहती हु जहा गलती की सजा नही मिलती है.
कितना लिखु दोस्त तेरी तारीफ मै स्याही,पन्ने,वक्त कम पडते है पर तेरी तारीफ खतम नही होती है.
By_S.Bhure.

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